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| नेपाल की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री बनीं सुशीला कार्की |
नेपाल ने इतिहास रचते हुए पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को देश की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया है। शुक्रवार रात राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने काठमांडू में राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में 73 वर्षीय सुशीला कार्की को पद की शपथ दिलाई। यह नियुक्ति देश में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के खिलाफ जन-आंदोलन के बाद हुई, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से हटा दिया।
Sushila Karki took oath as PM of the interim government in #Nepal, becoming the country’s first woman Prime Minister. pic.twitter.com/7dQGDi2gSY
— DD News (@DDNewslive) September 13, 2025
आंदोलन से
उभरी
नई
नेतृत्व
पिछले
कुछ दिनों में नेपाल में
"Gen Z" के नेतृत्व में भारी विरोध
प्रदर्शन देखे गए जो
भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और डिजिटल स्वतंत्रता
पर अंकुश के खिलाफ थे।
इन प्रदर्शनों में कम से
कम 51 लोगों की जान गई
और सैकड़ों घायल हुए। प्रदर्शनकारियों
ने सुशीला कार्की के नाम पर
सहमति जताई, जिन्हें उनकी निष्पक्षता और
भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर
रुख के लिए जाना
जाता है। "We Nepali
Group" जैसे युवा संगठनों ने
कार्की के नेतृत्व को
समर्थन दिया, इसे देश के
लिए एक नई शुरुआत
के रूप में देखा।
सुशीला कार्की:
एक
निष्पक्ष
और
साहसी
व्यक्तित्व
सुशीला
कार्की ने 2016 में नेपाल की
पहली महिला मुख्य न्यायाधीश के रूप में
इतिहास रचा था। उनके
कार्यकाल के दौरान, उन्होंने
भ्रष्टाचार के खिलाफ कई
साहसिक फैसले लिए, जिनमें तत्कालीन
सूचना और संचार मंत्री
जयप्रकाश गुप्ता को पद पर
रहते हुए जेल की
सजा सुनाना शामिल है। हालांकि, उनके
निष्पक्ष फैसलों ने कुछ राजनीतिक
दलों को नाराज किया,
जिसके कारण 2017 में उनके खिलाफ
महाभियोग प्रस्ताव लाया गया, लेकिन
यह प्रस्ताव पर्याप्त समर्थन न मिलने के
कारण विफल रहा।
कार्की
का जन्म 1952 में पूर्वी नेपाल
के बीरतनगर में हुआ था।
उन्होंने भारत के बनारस
हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से राजनीति विज्ञान
में मास्टर डिग्री और त्रिभुवन विश्वविद्यालय
से कानून की डिग्री हासिल
की। उनके करियर की
शुरुआत बीरतनगर में वकालत से
हुई, और 2009 में वह सुप्रीम
कोर्ट की जज बनीं।
चुनौतियों से
भरा
कार्यकाल
सुशीला
कार्की के सामने अब
कई चुनौतियां हैं। उनकी प्राथमिक
जिम्मेदारी 5 मार्च, 2026 को होने वाले
नए आम चुनावों को
स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप
से आयोजित करना है। इसके
अलावा, वह जल्द ही
एक छोटी मंत्रिपरिषद का
गठन करेंगी और संसद भंग
करने की सिफारिश कर
सकती हैं। देश में
हाल के हिंसक प्रदर्शनों
के बाद कानून-व्यवस्था
को बनाए रखना और
युवाओं के भरोसे को
जीतना भी उनके लिए
एक बड़ी चुनौती होगी।
भारत
के पूर्व राजदूत जयंत प्रसाद ने
कार्की की नियुक्ति को
नेपाल के लिए "स्थिरता
लाने वाला कदम" बताया
है। उन्होंने कहा, "सुशीला कार्की इस कठिन समय
में देश को स्थिरता
प्रदान करेंगी और अगले चुनावों
को सफलतापूर्वक आयोजित करने में सक्षम
होंगी।"
भारत से
विशेष
जुड़ाव
सुशीला
कार्की का भारत से
गहरा नाता रहा है।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा
होने के नाते, उन्होंने
भारत के प्रति अपनी
सकारात्मक भावनाएं व्यक्त की हैं। एक
साक्षात्कार में उन्होंने कहा,
"मैं गंगा को याद
करती हूं, और भारत
के लोगों के साथ नेपाल
का रिश्ता बहुत अच्छा है।"
भारत के राजदूत नवीन
श्रीवास्तव ने भी उनकी
नियुक्ति पर बधाई दी
है।
नेपाल के
लिए
नया
दौर
सुशीला
कार्की की नियुक्ति ने
न केवल नेपाल में
महिलाओं के लिए एक
मील का पत्थर स्थापित
किया है, बल्कि यह
भी दिखाया है कि युवा
शक्ति और निष्पक्ष नेतृत्व
मिलकर देश को नई
दिशा दे सकते हैं।
उनकी अगुवाई में नेपाल एक
नई राजनीतिक और सामाजिक शुरुआत
की ओर बढ़ रहा
है।

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