![]() |
| US Supreme Court ने क्यों रोके ट्रंप के “ग्लोबल टैरिफ” |
यह फैसला केवल आर्थिक नीति
तक सीमित नहीं है, बल्कि
यह अमेरिका में शक्तियों के
बंटवारे (Separation of
Powers) की संवैधानिक व्यवस्था को भी मजबूत
करता है। आइए समझते
हैं पूरा मामला क्या
था, अदालत ने क्या कहा
और इसका असर दुनिया
पर कैसे पड़ेगा।
⚖️
क्या
था
विवाद?
ट्रंप
प्रशासन ने 1977 के International Emergency
Economic Powers Act (IEEPA) का
हवाला देते हुए कई
देशों पर व्यापक आयात
शुल्क (टैरिफ) लगाए थे। प्रशासन
का तर्क था कि:
- · अमेरिका के साथ व्यापार असंतुलन “राष्ट्रीय आपातकाल” जैसा मुद्दा है
- · कुछ देशों से अवैध ड्रग्स की तस्करी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है
- · राष्ट्रपति को आपातकालीन शक्तियों के तहत ऐसे कदम उठाने का अधिकार है
इन टैरिफों का दायरा काफी
व्यापक था। कई प्रमुख
व्यापारिक साझेदार देशों के उत्पादों पर
अतिरिक्त शुल्क लगाया गया जिससे अरबों
डॉलर का व्यापार प्रभावित
हुआ।
BREAKING: The Supreme Court on Friday ruled that President Trump exceeded his authority when imposing sweeping tariffs using a law reserved for a national emergency. Chief Justice John Roberts wrote the majority opinion and the court agreed 6-3 that the tariffs exceeded the law.… pic.twitter.com/pHPkOdP1Yz
— CBS News (@CBSNews) February 20, 2026
🏛️
अदालत
ने
क्या
कहा?
इस मामले की सुनवाई Supreme Court of the United States ने की और
6–3 के बहुमत से फैसला सुनाया।
बहुमत की राय मुख्य
न्यायाधीश John Roberts
ने लिखी।
1️⃣
“Major Questions Doctrine” लागू
अदालत
ने कहा कि जब
कोई निर्णय आर्थिक और राजनीतिक रूप
से बहुत बड़ा प्रभाव
डालता है तो राष्ट्रपति
तभी ऐसा कर सकते
हैं जब कांग्रेस ने
स्पष्ट शब्दों में उन्हें यह
अधिकार दिया हो।
IEEPA में
ऐसा स्पष्ट प्रावधान नहीं है जो
राष्ट्रपति को सार्वभौमिक टैरिफ
लगाने की अनुमति देता
हो।
2️⃣
टैरिफ
लगाने
का
अधिकार
किसका?
अमेरिकी
संविधान के अनुसार आयात-निर्यात पर कर लगाने
का प्राथमिक अधिकार कांग्रेस के पास है।
अदालत ने दोहराया कि:
“व्यापक
व्यापारिक कर नीति बनाना
कार्यपालिका का नहीं, बल्कि
विधायिका का अधिकार है।”
3️⃣ आपातकाल की सीमा
न्यायालय
ने यह भी कहा
कि “राष्ट्रीय आपातकाल” की अवधारणा का
दायरा असीमित नहीं हो सकता।
यदि व्यापार घाटा ही आपातकाल
है तो फिर लगभग
हर साल राष्ट्रपति को
असीमित आर्थिक शक्तियाँ मिल जाएंगी — जो
संविधान की मंशा के
खिलाफ है।
#WATCH | Washington, DC | Visuals from outside the White House.
— ANI (@ANI) February 20, 2026
The Supreme Court of the United States has ruled against President Trump’s power to impose tariffs, declaring that his use of emergency authority to levy broad tariffs on US trading partners was unlawful. pic.twitter.com/Cyuhr1KItZ
💰
आर्थिक
प्रभाव:
क्या
होगा
अरबों
डॉलर
का?
रिपोर्टों
के अनुसार इन टैरिफों से
अमेरिकी सरकार ने 130 से 170 अरब डॉलर तक
राजस्व जुटाया। अब बड़ा सवाल
यह है कि:
- · क्या कंपनियों को रिफंड मिलेगा?
- · क्या सरकार पिछली वसूली को बरकरार रखेगी?
- · क्या नया कानून लाकर फिर से टैरिफ लगाए जाएंगे?
अदालत
ने सीधे तौर पर
रिफंड पर आदेश नहीं
दिया है। यह मुद्दा
अब निचली अदालतों या कांग्रेस के
निर्णय पर निर्भर करेगा।
🌍
वैश्विक
व्यापार
पर
असर
इस फैसले से कई देशों
को राहत मिली है।
यूरोप, एशिया और लैटिन अमेरिका
के निर्यातकों को उम्मीद है
कि:
- · व्यापार में अनिश्चितता कम होगी
- · अमेरिकी बाजार में कीमतें स्थिर होंगी
- · सप्लाई चेन पर दबाव घटेगा
हालांकि
विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य
में अमेरिकी प्रशासन अन्य कानूनी प्रावधानों
— जैसे सेक्शन 232 (राष्ट्रीय सुरक्षा) या सेक्शन 301 (अनुचित
व्यापार प्रथाएं) — का सहारा ले
सकता है।
🗳️
राजनीतिक
संदेश
यह फैसला केवल कानूनी नहीं
बल्कि राजनीतिक रूप से भी
महत्वपूर्ण है।
- · यह कार्यपालिका की शक्तियों पर स्पष्ट सीमा तय करता है।
- · कांग्रेस की भूमिका को मजबूत करता है।
- · आगामी चुनावी बहस में व्यापार नीति को फिर से प्रमुख मुद्दा बना सकता है।
रिपब्लिकन
खेमे के कुछ नेताओं
ने फैसले पर असहमति जताई
है, जबकि डेमोक्रेट नेताओं
ने इसे संविधान की
जीत बताया है।
📊
क्या
बदलेगा
आगे?
- · राष्ट्रपति अब व्यापक ग्लोबल टैरिफ अकेले लागू नहीं कर पाएंगे।
- · व्यापार नीति में कांग्रेस की भूमिका बढ़ेगी।
- · भविष्य में “आपातकाल” की घोषणा पर अदालतें अधिक सख्ती दिखा सकती हैं।
- · अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में स्थिरता आ सकती है।
विशेषज्ञों
का मानना है कि यह
फैसला आने वाले वर्षों
में प्रशासनिक शक्तियों से जुड़े अन्य
मामलों में भी मिसाल
बनेगा।
🔎
निष्कर्ष
US Supreme Court का
यह निर्णय अमेरिकी संवैधानिक ढांचे में शक्तियों के
संतुलन की पुनः पुष्टि
करता है। Donald Trump द्वारा लगाए गए ग्लोबल
टैरिफ को खारिज कर
अदालत ने साफ कर
दिया कि आर्थिक नीति
जैसे बड़े फैसले केवल
राष्ट्रपति के आदेश से
नहीं, बल्कि कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी
से ही लागू हो
सकते हैं।
यह फैसला न केवल अमेरिका
की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करेगा
बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में भी स्थिरता
का संकेत देता है। आने
वाले महीनों में यह देखना
अहम होगा कि क्या
कांग्रेस नया कानून लाती
है या प्रशासन कोई
वैकल्पिक रणनीति अपनाता है।

Hi Please, Do not Spam in Comments